जीवन का सच्चा मूल्य

जीवन का सच्चा मूल्य

परिचय

जो कुछ भी स्वयं से बढ़ता है और उसका स्वयं का मेटाबोलिज्म (चय-पचय) होता है, उसे जीवित या जीवन के रुप में माना जाता है। मनुष्य, जानवर, कीड़े, सुक्ष्म जीव, पौधे ये सभी जीवित है या इनमें जीवन होता है। ग्रह पर बहुतायत मात्रा में जीवन उपलब्ध है, लेकिन इनकी गुणवत्ता क्या मायने रखती है? जीवन की गुणवत्ता, विशेषता विभिन्न इंद्रियों द्वारा पहचाना जाता है, इसके बारे में हम इस निबंध में चर्चा करेगें।

जीवन का सच्चा मूल्य

हम अपने चारों ओर विभिन्न प्रकार के जीवन से घिरे हुए है। पौधों, जानवरों, कीड़ों, पक्षियों, उभयचरों आदि सहित अन्य अरबों प्रजातियां इस ग्रह पर है, प्रत्येक और हर एक का जीवन, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, सबका एक महत्वपूर्ण स्थान है, इनका अपना ही एक मूल्य है और ये इस पारिस्थितिकी तंत्र में अपने तरीके से अपना योगदान देते है। लेकिन कुछ अलग मूल्यों और गुणों के कारण मानव जीवन को दूसरों की तुलना में अधिक मूल्यवान माना जाता है, जो अस्तित्व में एक दूसरे के मूल्यों से जोड़ता है। 


मानव अस्तित्व के सही और सच्चे मूल्यों को समझने के लिए, सिर्फ खाने और काम करने का अलावा हमें जीवन को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। जीवन का सच्चा अर्थ है कि दूसरों की रक्षा करें और उसकी हमेशा मदद करें। सौभाग्य से मनुष्यों को असाधारण बुद्धि और दिमाग के साथ निपुणता के उपहार एक साथ दिया गया है, और ऐसा कोई अन्य प्राणी इस ग्रह पर नहीं है। केवल मनुष्य ही आवश्यकता के समय के साथ एक दूसरे की सहायता कर सकता है, और साथ ही साथ अन्य जीवित प्राणीयों की आवश्यकता पड़ने पर मदद करने की क्षमता रखता है।

मानव जीवन का यही सबसे बड़ा मूल्य है, जो मनुष्य धारण किए हुए है। दूसरे शब्दों में कहें तो जीवन का सच्चा मूल्य दूसरों के लिए कितने मदद का मूल्य अपने अंदर रखता है। एक ऐसे पेड़ के उदाहरण पर चर्चा करते है जो दशकों से सूरज और बारिश से अपनी टहनियां को दूर रखता आ रहा है। उस पेड़ का जीवन निश्चित रुप में काफी मूल्यवान है। इसी प्रकार पेड़ की तरह अपने जीवन के मूल्यक को प्राप्त करना चाहते है तो हमेशा दूसरों की सेवा, प्यार और देखभाल करने में अपने जीवन को खर्च करे।

जीवन में मूल्यों को कैसे जोड़े?

अब जब हमने जीवन के सही मूल्यों के बारे में जान लिया है कि इसका सही मूल्य क्या है, तो अब हम उनके परिवर्तनों के बारे में चर्चा करेगें जिससे की हम अपने जीवन को अधिक मूल्यवान बनाने के लिए उन्हें अपना सकें। जीवन में मूल्यों को जोड़ना सबकुछ नही है, बल्कि अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन करना है। आपको बस दूसरों को देखने और अपने देखने के तरीकों में बदलाव करना पड़ेगा। नीचे कुछ बदलाव के बारे में चर्चा की है जिन्हें आप अपने जीवन के मूल्यों में जोड़ने के लिए अपना सकते है।

बहिर्मुखी बनें

आप खुद को केवल अपने तक ही सीमित न रखें, बल्कि दूसरों तक भी पहुंचे या दूसरों के संम्पर्क में भी रहे। उनसे जुड़कर आप उनकी समस्याओं, आकांक्षाओं इत्यादि के बारे में जानें। अपने पड़ोसियों से बात करे और उन्हें सामाजिक बनायें। जितना अधिक आप समाजिकरण करेगें आपके मूल्यों में उतनी ही वृद्धि होती रहेगी।

सम्मान दें

अपने जीवन को और अधिक मूल्यवान बनाने के लिए एक और तरीका है कि आप दूसरों को अधिक सम्मान दे - चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, बलवान हो या कमजोर सभी को सम्मान दें। यदि आप दूसरे सभी के साथ सम्मान का व्यवहार करेंगे तो आप न केवल अपने जीवन को सम्मान के लायक बनाएंगे बल्कि आप दूसरों के सम्मान को भी अर्जित कर सकेंगे।

विचारशील और सहायक बनें

आपको हमेशा दूसरों की पीड़ा और जरूरतों के प्रति विचारशील होने की आवश्यकता है, केवल इंसानों के प्रति ही नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी यही भाव रखना चाहिए। उनकी मदद करें, समर्थन करें और उनकी समस्याओं के प्रति दया भाव रखें।

दूसरे के जीवन को भी महत्व दें

आप जितना ही अधिक मूल्य अन्य के जीवन को देगें, उतना ही अधिक मूल्य आप खुद के लिए भी जोड़ेंगे। यह एक तरह से लेन-देन का रिश्ता होता है। अन्य के जीवन से मेरा मतलब है मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं, पौधों, पक्षियों आदि के जीवन से हैं।

साहसी बने

एक साहसी व्यक्ति खड़े होकर अपने जीवन और साथ ही दूसरों के जीवन के लिए भी बोल सकता है। इसके विपरीत किसी में साहस की कमी का मतलब है कि अपने जीवन को डर और निराशा में बिताना। ऐसे जीवन का मतलब न तो खुद के लिए कोई महत्व है और न ही यह दूसरों के लिए किसी काम का है।

निष्कर्ष

जीवन की परिभाषा बहुत ही विशाल है, और यह कई मामलों में एक दूसरे से बहुत ही अलग हो सकती है, लेकिन जीवन का सारांश यह है कि – “जीवन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि यह कितनी लंबी है, लेकिन यह कितना मूल्यवान है ये हम ही तय करते है”।

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